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Women Rights | महिलाओं के अधिकार

women rights

भारत में शादी को एक बहुत ही पवित्र बंधन माना जाता है जिसमें ना केवल दो इंसान बंधते हैं बल्कि दो परिवार भी बंधते हैं। भारत में जहां बहू (Bride) को घर की लक्ष्मी मानते हैं वहीं बहुत से फ़ैमिली में उसी बहू के साथ अत्याचार भी होते हैं। आज भी काफी शादीशुदा महिलाएं अपने पति के यहां खुशहाल जीवन नहीं बता पाती है और घरेलू हिंसा(domestic वायलेंस), दहेज प्रथा(dowry system) और भी ना जाने कितने तरीकों से उन पर अत्याचार होते हैं।
बहुत से cases मे तो महिला की जान भी चली जाती है और काफी दुखद परिणाम होते हैं। घरेलू हिंसा(Domestic violence) और दहेज के प्रति अत्याचार से महिलाओं की मृत्यु की संख्या काफी बड़ी है। इसमें आश्चर्यजनक बात यह है कि काफी महिलाओं को पता ही नहीं होता है कि उनके भी कुछ अधिकार(Rights) है। वे चुपचाप पूरे अन्याय को सहन करती रहती हैं और कुछ नहीं कहती।

इस अन्याय से लड़ने के लिए महिलाओं को उनके अधिकार पता होने चाहिए। ताकि वह खुद के लिए और अपने बच्चों के लिए लड़ाई लड़ सकें। तो आइए आज हम आपको बताते हैं कि किसी महिला पर अगर किसी भी तरह का अत्याचार उसके पति के घर में हो रहा है तो उसे क्या करना चाहिए एवं क्या उसके constitutional rights है।

घर में रहने का अधिकार (Right to reside in Martial home)

भारत में अगर किसी शादीशुदा(Married) महिला की उसके ससुराल(In-laws) वालों के साथ लड़ाई होती है तो सबसे पहले उस को घर से बाहर निकाल दिया जाता है। लेकिन हम आपको बता दें कि Hindu Adoption and Management Act, 1956 के तहत शादीशुदा महिला का अपने पति के घर में रहने का सामान्य अधिकार है। चाहे वह घर उसके पति के नाम पर हो या पति के माता पिता के नाम पर लेकिन कोई उसको घर से बाहर नहीं निकाल सकता। किसी कारणवश महिला के पति की मृत्यु भी हो जाती है तब भी उसका यह अधिकार रहता है।

अगर महिला पर उसके पति के द्वारा या उसके सास ससुर (In-laws) के द्वारा शोषण किया जाता है चाहे वह मारपीट हो या फिर मानसिक शोषण हो। ऐसे case में महिला Indian Penal Code के section 498-A के तहत पुलिस में अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। इससे महिला के in-laws को 3 साल तक की सजा भी हो सकती है।

Section 306, Indian Penal Code

अगर कोई महिला अत्याचारों से तंग आकर अपनी ससुराल में Suicide कर लेती है तो इस एक्ट के तहत उसके ससुराल वालों पर केस हो सकता है। इस मामले में उसके ससुराल वालों पर Fine के साथ 10 साल तक की सजा भी हो सकती है।
महिलाओं के अधिकार

Domestic Violence Act, 2005

इस एक्ट के तहत अगर किसी मैरिड महिला को लगता है कि उसके ससुराल वाले उस पर दहेज या किसी भी प्रकार को लेकर उसके साथ वायलेंस कर रहे हैं। तो महिला इस act के तहत पुलिस में अपनी complaint दर्ज करा सकती है। कोर्ट में फैसला होने पर महिला को कड़ी सुरक्षा भी दी जाती है।

स्त्री धन का अधिकार (Right to Streedhan)

हर महिला का शादी होने के समय पर यह शादी होने के बाद स्त्री धन का अधिकार होता है। स्त्री धन शादी के दौरान महिला को मिलने वाले gifts को कहते हैं। इसी भारत में गोद भराई(Godd Bharai) अथवा मुंह दिखाई( Mooh dikhayi) के नाम से भी जानते हैं। इसका कारण यह है महिला को शादी के बाद उसके लिए कुछ आर्थिक रूप से मदद हो सके जो कि वो जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल कर सकें।

Right to Child Maintenance

अगर कोई शादीशुदा महिला किसी कारणवश अपने बच्चों की परवरिश नहीं कर पा रही है। तो यह उसका अधिकार( Constitutional Right) है कि वह अपने पति से अपने बच्चों की देखरेख का जिम्मा उठवाए। अगर किसी कारणवश पति और पत्नी दोनों ही ऐसा करने में असमर्थ है तो बच्चों की अच्छी परवरिश का जिम्मा पति के माता-पिता को उठाना होगा.

महिलाओं को ना समझो बेकार, जीवन का है यह आधार।

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