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रक्षाबंधन क्यों मनाया जाता है? (Why Rakshabandhan Is Celebrated)

Rakshabandhan
Written by Abhilash kumar

भारत एक विशाल(vast) देश है जिसमें अनेक जातियों(religion) के लोग प्रेम से रहते हैं। उसी तरह अनेक जातियों के लोग अपने त्यौहार(festivals) बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। जिनमें से रक्षाबंधन(Rakshabandhan) भारतीयों का एक मुख्य त्योहार है। रक्षाबंधन मुख्यतः(mainly) भाई और बहन के प्यार का प्रतीक है। रक्षाबंधन भारत में बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है। रक्षा का मतलब सुरक्षा(security) और बंधन का मतलब बाध्य(bound) होता है। रक्षाबंधन में राखी का सबसे अधिक महत्व होता है जिसको रक्षा सूत्र भी कहते हैं। इस दिन बहनें अपने भाईयों के राखी(Rakhi) बांधती हैं, चाहे उनका भाई उनसे उम्र में छोटा हो या बड़ा हो। इसके साथ ही भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वचन देते हैं।

कब मानते है रक्षा बंधन

रक्षाबंधन(Rakshabandhan) श्रावण मास(month) की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों से कितनी भी दूर है या तो बहने अपने भाई के घर आकर उनको राखी(Rakhi) बांधती हैं। अगर किसी कारणवश(due to some reason) बहनें शादी के बाद भाई के घर नहीं आ पाती हैं तो भाई उनके घर जाकर राखी बंधवा कर आते हैं।
रक्षाबंधन(Rakshabandhan) के दिन बहने अपने भाइयों की तरक्की के लिए भगवान से प्रार्थना करती हैं और बदले में भाई उनका जीवन भर रक्षा करने का वचन देते हैं। वचन के साथ साथ साथ भाई अपनी बहनों को तरह-तरह के उपहार(gifts) भी देते हैं। कुछ परिवारों में बेटियां अपने पिता के भी राखी बांधती हैं राखी बांधती हैं और बुआ अपने भतीजे के के राखी(Rakhi) बाँधती है। रक्षाबंधन के दिन बाजार में अलग ही उत्साह होता है और दुकानें राखियों से सजी हुई होती हैं।

रक्षाबंधन(Rakshabandhan) क्यों मनाया जाता है इसके पीछे कई कहानियां प्रसिद्ध(popular) हैं। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-

Rakshabandhan

द्रौपदी और श्री कृष्ण की कथा

इसमें से एक कहानी श्री कृष्ण और द्रौपदी के बीच है। एक बार युद्ध(war) के दौरान श्री कृष्ण की उंगली घायल(injured) हो गई तथा उसमें से रक्त(blood) बह रहा था| तो द्रोपदी ने अपनी साड़ी(saree) में से एक टुकड़ा काटकर बांध दिया । इस उपकार के बदले श्री कृष्ण ने द्रौपदी को वचन देते हुए कहा कि वह जिंदगी भर उनकी रक्षा(care) करेंगे। इसके बाद श्री कृष्ण ने ने द्रोपदी की जिंदगी भर रक्षा की। इतिहास(History) इस बात का गवाह है।

बादशाह हुमायूं और कर्मावती की कथा

एक बार mughal बादशाह(king) हुमायूं चित्तौड़ पर आक्रमण(attack) करने के लिए ज़ोरों सोरों से आगे बढ़ रहे थे। ऐसे मे कर्मावती ने हुमायूं को रेशम के धागे(thread) की राखी भेजकर चित्तौड़ पर आक्रमण न करने की विनती की। हुमायूं ने मुसलमान होते हुए भी राखी की लाज रखी और चित्तौड़ पर आक्रमण(attack) नहीं किया। यही नहीं उन्होंने भविष्य में भी चित्तौड़ की रक्षा की।
पौराणिक कथा

एक बार देवताओं(good) में और दानवों(bad) में कई साल तक युद्ध चलता रहा। देवताओं को दानवों पर जीत नहीं मिल रही थी और उन पर हार का खतरा मंडरा रहा था। ऐसे में इंद्र की पत्नी इंद्राणी ने रेशम का धागा कई पूजा-अर्चना करने के बाद इंद्र को बांधा। इसके बाद देवताओं की जीत हुयी। ऐसा माना जाता है की इंद्राणी के बांधे हुए रेशम के धागे की की बदौलत ही देवता दानवों पर जीत दर्ज कर पाए थे।

तो रक्षाबंधन(Rakshabndhan) भारत में एक बेहद ही पवित्र(holy) त्यौहार है। यह सिर्फ एक धागे(thread) का त्यौहार नहीं है बल्कि यह उस धागे में छिपे विश्वास और उसमें साधना का प्रतीक है। रक्षाबंधन के दिन ‘घेवर'(Ghevar) नाम की मिठाई काफी प्रचलित रहती है जिस को खूब पसंद भी किया जाता है। पिछले कुछ सालों में भारत सरकार भी महिलाओं के लिए सरकारी(govt.) बस में किराया free कर दिया जाता है ताकि वह आसानी से अपने भाइयों के राखी बांधने जा सके जा सके । साथ ही भारत सरकार इस दिन महिलाओं के लिए सुरक्षा(security) के कड़े इंतजाम भी रखती है।
Rakshabandhan

पेड़ों का महत्व समझते हुए कई लोग पेड़ों के भी राखी बांधते हैं। समय कितना भी आगे जा चुका हो लेकिन यह त्योहार अभी भी उसी हर्ष उल्लास(joy & happiness) और प्रेम के साथ मनाया जाता है। ऐसा नहीं है कि रक्षाबंधन केवल हिंदुओं में मनाया जाता है भारत के जैन, बुद्धिस्ट और कुछ मुस्लिम परिवार भी रक्षाबंधन को बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। 1857 में बंगाल के बंटवारे(partition) के दौरान हिंदू और मुस्लिम लोगों ने एक दूसरे को राखी बांधकर अंग्रेजों को भारत की एकता का जवाब दिया था।

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Abhilash kumar

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