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The Mystery Of Bhangarh Fort (भानगढ़ किले का रहस्य)

the mystery of bhangarh
Written by Abhilasha Kumari

भानगढ़ किले का रहस्य

वैसे तो भारतवर्ष हमेशा से पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बना रहा है। भारतवर्ष के विभिन्न राज्यों में एक से बढ़कर एक पर्यटन के अद्भुत केन्द्र हैं , और जब हम पर्यटन स्थलों की बात कर रहे हों, तब हमारे दिमाग में कई ऐतिहासिक इमारतों की छवि बन ही जाती है। हमारे देश में कई ऐसी ऐतिहासिक इमारतें व किले हैं, जिनके बारे में काफी कहानियां प्रचलित हैं और उन्हीं ऐतिहासिक इमारतों में से एक है – भानगढ़ का किला, जिसे हॉन्टेड फोर्ट यानी भूतिया किला के नाम से भी जाना जाता है। भानगढ़ किले का नाम सुनते ही लोगों में दहशत का माहौल हो जाता है। आखिर क्या है इस भानगढ़ के किले का रहस्य ? क्या वाकई यहाँ भूत प्रेतों का बसेरा है , या सिर्फ कुछ सुनी सुनाई बातें हैं ? क्या वाकई में रात में यहाँ जाने वाले लोग वापस नहीं आते ? ये वह सवाल है जिनका वाकई में किसी के पास सही जवाब नहीं है। मानने वाले लोग इसे भूतिया मानते हैं और जो नहीं मानते वे इसे कल्पना मात्र कहते हैं। सच भले ही कुछ भी हो फिर भी लोग बड़ी तादाद में यहां आते हैं।

आइए जानते हैं इस किले को कब और किसने बनवाया , तथा इसके हॉन्टेड फोर्ट कहे जाने के पीछे क्या रहस्य है –

भारतवर्ष के राजस्थान राज्य में कई राजा महाराजाओं का राज्य रहा है, जिसके कारण यहां कई दुर्ग व किले बने हुए हैं। यहां स्थित सभी किले अपने पीछे कई कहानियों को कहते हैं। इन किलों में से एक भानगढ़ का किला भी है। दिल्ली से लगभग 235 कि.मी. दूर राजस्थान के अल्वर जिले में यह किला स्थित है। यह किला जयपुर और दिल्ली मार्ग के बीच में स्थित ‘सरिस्का राष्ट्रीय उद्यान’ के एक छोर से लगा हुआ है।
भानगढ़ का किला अपनी बर्बादी के इतिहास व रहस्यमयी घटनाओं के लिए मशहूर है। यहां तक कि इसे भारत के सबसे डरावने स्थानों में गिना जाता है। यह किला यहां तक रहस्यमयी है कि पुरातत्व विभाग द्वारा सूर्योदय के पूर्व व सूर्यास्त के उपरांत किले में प्रवेश न करने के सम्बन्ध में चेतावनी जारी की गई है।
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भानगढ़ किले में होने वाली रहस्यमयी घटनाएं –

भानगढ़ का यह किला अब जीर्ण-शीर्ण स्थिति में उजड़ा पड़ा है, लोगों का कहना है कि यहां रात में किसी के रोने व चिल्लाने की आवाजें, पायल की आवाजें व घुंघरुओं की गूंज सुनाई देती है। जबकि कई वैज्ञानिकों का कहना है कि काफी समय से किला बन्द होने की वजह से यहां पर चमगादड़, झींगुर व कॉकरोच अत्यधिक मात्रा में हो गए हैं, जिसकी वजह से आवाजें आती हैं। यहां पर भूतों के होने या न होने पर तर्क वितर्क तो बहुत हैं , परन्तु इन बातों में किस हद तक सच्चाई है कोई नहीं जानता लेकिन पुरातत्व शास्त्रियों के खोज बीन करने के बाद इस किले को असामान्य घोषित कर दिया गया है तथा किले के द्वार पर यह चेतावनी लिख दी गई है कि सूर्योदय के पूर्व व सूर्यास्त के उपरांत किले में प्रवेश वर्जित है।

भानगढ़ किले का इतिहास –

इस किले का निर्माण आमेर के राजा भगवंतदास जी ने 1573 में करवाया था। उजाड़ होने के पहले यह किला 300 सालों तक आबाद रहा है। राजा भगवंतदास के पुत्र मान सिंह थे, जो मुगल बादशाह अकबर के बहुत करीब थे। मान सिंह के भाई माधो सिंह ने 1613 में किले को अपनी राजधानी बना लिया। माधो सिंह के तीन पुत्र थे। सुजान सिंह , छत्र सिंह व तेज सिंह, जिनमें से छत्र सिंह को माधो सिंह की मृत्यु के उपरांत भानगढ़ किले का अधिकार मिला।
भानगढ़ के इस किले के बारे में इतनी कहानियां प्रचलित हैं कि इसे भूतों का गढ़ भी कहा जाने लगा है। इस खौफनाक खंडहर की चारदीवारी में सदियों का इतिहास बन्द पड़ा है।
इस किले की तबाही के पीछे सदियों से चली आ रहीं कई कहानियां प्रचलित हैं। इस किले से एक या दो नहीं बल्कि सैकड़ों किस्से कहानियां जुड़े हुए हैं लेकिन इन कहानियों की सत्यता का अभी तक कोई प्रमाण नहीं मिला है। भानगढ़ के किले के असामान्य होने के बारे में कई कहानियां प्रचलित हैं, जिनमें से तीन मुख्य व प्रसिद्ध हैं –
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योगी ऋषि बालूनाथ के श्राप की कहानी –

पहली कहानी के अनुसार राजा भगवंतदास ने जिस जगह पर किले का निर्माण कराया उस जगह पर ऋषि बालूनाथ का तपस्थल था। ऋषि ने राजा भगवंतदास को इस वचन के साथ किले का निर्माण कराने की अनुमति प्रदान की थी, कि किले की प्रतिछाया उनकी कुटिया या तपस्थल पर नहीं पड़नी चाहिए। राजा भगवंतदास ने वचन को ध्यान में रखते हुए किले का निर्माण करवाया लेकिन बाद में उनके पुत्र माधो सिंह ने वचन की अवहेलना करते हुए किले की ऊपरी मंजिलों का निर्माण भी करवा लिया, जिससे किले की छाया ऋषि बालूनाथ जी की कुटिया पर पड़ गई जिससे क्रोधित होकर बालूनाथ जी ने श्राप दिया कि यह किला अब आबाद नहीं रहेगा। कहा जाता है कि उनके श्राप के प्रभाव से ही किला ध्वस्त हो गया।

राजकुमारी रत्नावती व तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की कहानी –

इस कहानी के अनुसार भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत सुंदर थी, उसकी सुन्दरता की चर्चा पूरे भानगढ़ तथा दूर-दूर तक अन्य राज्यों में भी थी। कई राज्यों के राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छुक थे।

भानगढ़ राज्य में सिंधु सेवड़ा नाम का एक ताकतवर तांत्रिक रहता था। वह काले जादू , तंत्र मंत्र में बहुत पारंगत था। राजकुमारी रत्नावती को देखकर वह उनकी सुन्दरता पर इस कदर आशक्त हो गया कि किसी भी कीमत में वह राजकुमारी रत्नावती को हासिल करना चाहता था। सिंधु सेवड़ा उस समय का बहुत ताकतवर तांत्रिक था, जो अपने काले जादू से किसी को भी अपने वश में कर लेता था। तांत्रिक सिंधु सेवड़ा ने राजकुमारी को अपने वश में करने की योजना बनाई। राजकुमारी को इत्र बेहद पसन्द था। एक दिन जब राजकुमारी रत्नावती की दासी बाजार में उनके लिए इत्र लेने गई तब सिंधु सेवड़ा ने राजकुमारी को दी जाने वाली इत्र की बोतल पर तांत्रिक शक्तियों का प्रयोग कर वशीकरण मन्त्र की दवा मिला हुआ इत्र राजकुमारी के लिए भेज दिया।

उसकी योजना थी कि वशीकरण मन्त्र के प्रभाव से राजकुमारी उसके वशीभूत हो जाएगी। परन्तु राजकुमारी तांत्रिक का छल भांप गयी और उन्होंने इत्र की बोतल एक चट्टान पर फेंक दी, जिससे इत्र की बोतल उस चट्टान पर ही टूट गई और सारा इत्र चट्टान में गिर गया। तंत्र विद्या के प्रभाव से वह चट्टान तीव्र गति से तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की ओर जाने लगी। तांत्रिक ने जब चट्टान को अपनी तरफ आता देखा तो उसे अपनी मृत्यु निकट आते हुए दिखाई दी। तभी उसने क्रोध में आकर भानगढ़ को बर्बाद होने तथा सभी निवासियों की मृत्यु के पश्चात उनकी आत्माओं को किले में भटकते रहने का श्राप दिया और चट्टान के नीचे दबकर सिंधु सेवड़ा की मृत्यु हो गई। कहा जाता है तभी से तांत्रिक के श्राप के प्रभाव से आज भी किले में आत्माएं भटकती हैं।

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किले के भूतिया होने के पीछे खजाने की कहानी –

भानगढ़ के किले को लेकर मान्यता है कि सदियों पहले जब यह शहर उजड़ा तब इसके मलबे में यहां का सारा खजाना दब गया था। जिसे उस वक्त किसी और स्थान पर नहीं ले जाया जा सका इसलिए इस खजाने को लोगों की नजरों से बचाने के लिए यहां भूतों के होने का भ्रम फैलाया गया था जो आज तक फैला हुआ है।

भानगढ़ किले के विषय में कुछ रोचक तथ्य –

कहा जाता है कि इस किले के गलियारों में रात को घुंघरुओं की आवाज व किसी के रोने की आवाज सुनाई देती है।
यह भी कहा जाता है कि राजा के तहखाने में प्रवेश करने वाला व्यक्ति मर जाता है तथा आज भी किले के दरबार में राजा अपना फैसला सुनाते हैं।
लोगों द्वारा यह बात भी सुनने को मिलती है कि जो भी रात को इस किले में गया है वह मृत पाया गया है।
भानगढ़ के इस किले में सूर्योदय के पूर्व व सूर्यास्त के बाद प्रवेश करना सख्त मना है।
नोट – यहां पर हम किसी भी प्रकार के अंधविश्वास का समर्थन नहीं कर रहे हैं, यह लोगों द्वारा बताई गई कहानियां हैं जिनका अभी तक कोई ऐतिहासिक प्रमाण प्राप्त नहीं हुआ है।

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