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Rain Of Diamond

Diamond Rain (हीरो की बारिश )

नमस्कार दोस्तों आज हम बात करने जा रहे है Diamond Rain की जी हां Diamond Rain क्या आपने कभी Diamond Rain के बारे में सुना है ? इस Blog में आपको Diamond Rain के बारे में पता चलेगा कि Diamond Rain कहा होती है ? तथा सबसे बड़ी बात Diamond Rain कैसे होती है ? इस Blog को पूरा पढ़ने के बाद आपको इन सभी सवालो के जवाब मिल जायेंगे

Rain Of Diamond

Rain Of Diamond

ऐसा माना जाता है कि Neptune और Uranus पर हीरो की बारिश होती है ! हमारे Scientists को पिछले 40 वर्षो से इस बात पर संदेह है क्यूंकि सौरमंडल के बाहरी ग्रहो का अध्धयन करना बड़ा मुश्किल काम है ! और अभी तक एक ही अंतरिक्ष मिशन Voyager 2 से ही कुछ जानकारी मिल पाई है !

The Ice Giant

Neptune और Uranus को Ice Giant कहा जाता है क्यूंकि इनके बाहरी दो परतो में यौगिक होते है जिनमे हीलियम और हाइड्रोजन शामिल है खगोल विज्ञान में, बर्फ में प्रकाश तत्व के सभी यौगिकों को संदर्भित किया जाता है जिनमे हाइड्रोजन होता है ,इसलिए ग्रहो का पानी(H2O), अमोनिया(NH3), और मीथेन(CH4) ,उन्हें बर्फीला बनाते है ! क्यूंकि दोनों ग्रहो के वातावरण में मीथेन की मात्रा बहुत ज्यादा है इसलिए इन ग्रहो का रंग Bluish है !
Neptune के वातावरण में हीलियम और हाइड्रोजन की 3000 km मोटी परत है जिसके नीचे बर्फ की 17,500 km की मोटी परत है ! कुछ वैज्ञानिको का मानना है कि गुरुत्वकर्षण के कारण इन बर्फ़ो पर बहुत ज्यादा दबाव बनता है जिसके कारण इनके अंदर का तापमान कई हज़ार केल्विन तक तापमान बढ़ जाता है जिसके कारण बर्फ घने तरल पदार्थ का रूप ले लेता है !

ऐसी गर्मी और दबाव के कारण अमोनिया और मीथेन में रसायनिक परिवर्तन होते है ! वैज्ञानिको ने बर्फ की परतो के भीतर यौगिकों के बीच हीरा बनने के सिद्धांत को प्रतिपादित किया है !

सबसे पहला सिद्धांत

Lawrence Livermore National Laboratory के Marvin Ross ने पहली बार 1981 में प्रकृति में Diamond Rain के विचार को पेश किया “The Ice Layer Of Uranus and Neptune-Diamond in The Sky” ? उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन से कार्बन को अलग करके हीरा बनाया जा सकता है ! Sandro Scandolo और कुछ अन्य ने भविष्यवानी की है कि हीरे 300 Gigapascals से अधिक दबाव में ही बने होंगे !

हाइपोथिसिस का परीक्षण

हाँलाकि Ross का विचार बहुत आकर्षक था लेकिन उस समय के लिए एक काल्पनिक था और अवलोकनों द्वारा सत्यापित किये जाने की आवश्कता थी ! किसी भी कल्पनाशील तकनीक के साथ यह जांच असंभव था! कोई ऐसी तकनीक हो जो Neptune और Uranus के वातावरण में जा सके तथा ये बता सके कि हीरे का गठन कैसे हुआ है ? इसके बजाय वैज्ञानिको ने अपनी प्रयोगशाला में ग्रहो के अंदरुनी हिस्से को बनाने की कोशिश की गई !
Scientists ने इस प्रयोग के लिए Carbon और Hydrogen से बने Plastic Polistarin को चुना ! इसके बाद Laser की मदद से उतना दबाव दिया गया जितना की Neptune और Uranus के अंदरूनी हिस्सों में पाया जाता है इसके लिए Lab में Scientists ने 9000 Degree Farenhiet और 150 Gigapascle दबाव वाला एक क्षेत्र बनाया ! जिसमे से मीथेन गैस को पास किया गया ! इस प्रयोग में यह पाया गया कि Carbon और Hydrogen के बीच का Bond टूट गया और Carbon के Atoms Nano Diamond में बदल गए हाँलाकि जो Diamond बने वो कुछ Nanometer के ही थे !

Diamond Rain

Neptune और Uranus के वातावरण में मीथेन गैस बहुत ज्यादा मात्रा में है और उसे Pressurized जिसको करने पर Hydrogen और Carbon अलग अलग हो जाते है और Carbon हीरे की शक्ल ले लेता है ! Researcher की टीम ने कहा है कि Lab में Diamond का आकार Nanometer है लेकिन Neptune और Uranus पर हीरे का आकार सामान्य ओलो से लेकर पत्थर के आकार तक का हो सकता है !

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