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आखिर कैसे पेट्रोल डीजल के पैसे बढ़ते है

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संपूर्ण विश्व परिवहन संसाधनों के आसपास ही केंद्रित है। चाहे वो लोगों से जुड़ना हो,सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाना हो या फिर काम पर जाना हो। यातायात आज हमारे जीवन का एक जरूरी हिस्सा बन चुका है। यातायात को सही ढंग से चलाने के लिए पेट्रोल और डीजल (petrol and diesel) की जरूरत होती है।और जब इनके दाम में अस्थिरता आ जाए तो उसका आम जनजीवन पर प्रभाव पड़ना निश्चित है।भारत में पिछले कुछ महीनो से लगातार पेट्रोल (petrol) और डीजल (diesel) के कीमतों में बढ़ोत्तरी हुई,हालांकि पिछले कुछ हफ्तों में पेट्रोल (petrol) और डीजल के कीमत कम हुए है।आखिर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में परिवर्तन कैसे होते है? आखिर वह कौन से कारण है जिसके कारण कभी पेट्रोल के दाम आसमान छूने लगते है,तो कभी इनके कीमतों में कमी आने लगती है?

भारत और अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार

भारत में पेट्रोल और डीजल के कीमत अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों के आधार पर निर्धारित किए जाते है। इसका मुख्य कारण है भारत के पास कच्चे तेल का कोई स्त्रोत न होना।भारत कच्चे तेल के लिए मुख्यतौर पर खाड़ी देशों पर निर्भर है।इसका अर्थ हुआ यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम बढ़ते है तो भारत में भी पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ेंगे और यदि अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आती है तो भारत में भी हमें पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी होगी। पिछले कुछ महीनो में भी हमे कुछ यही प्रकिया देखने को मिली है। मगर हम यह भी देख सकते है कि जिस तेजी से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में परिवर्तन होते है ,उससे कहीं अधिक तेजी से भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में परिवर्तन होते है।आखिर ऐसा क्यों होता है? इसे समझने के लिए हमे भारत में पेट्रोल और डीजल के कीमतों के निर्धारण के ढांचे को समझना पड़ेगा।
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कैसे तय होती है पेट्रोल-डीजल के दाम (How petrol and diesel prices are decided)?

हमे कच्चा तेल जिस रूप में प्राप्त होता है,उसका इस्तेमाल उसी रूप में कर पाना संभव नही होता। उसे कच्चे तेल से पेट्रोल या डीजल बनाने के लिए रिफाइनिंग की प्रक्रिया से गुजरना होता है। इसके अलावा पेट्रोल एवं डीजल पर दो प्रकार का कर लगाया जाता है। पहला Excise Duty जिसे केंद्र सरकार वसूल करती है।और दूसरा VAT(Value Added Tax) जिसे राज्य सरकार वसूल करती है।ये दो ऐसे कर है जिसके कारण पेट्रोल और डीजल की कीमत सबसे अधिक प्रभावित होती है।विभिन्न करों के लगने के पश्चात तेल कंपनियों को इसे फ्यूल स्टेशन तक पहुँचाना होता है।फिर फ्यूल स्टेशन मालिक इस पर अपना कमीशन वसूल करते है।अंततः रिफाइनरी के खर्चे,यातायात के खर्चे,विभिन्न करों एवं कमीशन के बाद पेट्रोल एवं डीजल आम नागरिकों तक पहुँचता है।जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों एवं भारतीय बाजार में पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में जमीन आसमान का फर्क होता है।

इन सभी के अतिरिक्त पेट्रोल और डीजल के कीमतों में परिवर्तन का एक बड़ा कारण डॉलर के मुकाबले में रूपये का कमजोर होना भी है।डॉलर की तुलना में रूपये की कीमत किस तरह पेट्रोल को कीमतों को प्रभावित करता है?कच्चा तेल हमे अंतर्राष्ट्रीय बाजार से प्राप्त होता है और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सभी लेनदेन के लिए डॉलर का इस्तेमाल किया जाता है।यदि रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होगा तो हमे 1$ के लिए अधिक रूपये का भुगतान करना पड़ेगा।जिसके कारण हमें कच्चा तेल मंहगा पड़ेगा।जिससे पेट्रोल और डीजल के कीमत का बढ़ना निश्चित है।
कच्चा तेल एक गैर नवीकरणीय संसाधन है जिसका एक दिन ख़त्म होना निश्चित है।जैसे- जैसे इसकी कमी होगी वैसे-वैसे इसके कीमत बढ़ेंगे,मगर बढ़ते ईंधन(पेट्रोल और डीजल) की जरूरत को देखते हुए हमें ईंधन के अन्य स्रोतों को विकल्प के रूप में तलाशने होंगे। हमे ईंधन के कुछ और स्त्रोतों जैसे बायोगैस,विद्युत ऊर्जा,पवन ऊर्जा इत्यादि के इस्तेमाल को बढाना होगा।

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