Poetry

Miss confusion

miss confusion
Written by Abhilash kumar

Miss confusion

“बड़ा अच्छा लगता था“

छोटी छोटी बातों पर
उसका परेशान हो जाना,,,
मेरा उसे Miss confusion
कहकर चिढ़ाना,,,
Miss confusion बोलने पर
उसका मुझे आँखे दिखाना,,,
बड़ा अच्छा लगता था,,,

सर्दियों के दिनों में उसका
कैप वाली जैकेट पहन कर आना,,,
पीछे से कैप खींचकर
उसको बार बार सताना,,,
उसका बार बार
मान -जा ,मान -जा कहकर चिल्लाना,,,
बड़ा अच्छा लगता था,,,

कुछ लेक्चर्स के लिए उसका
हमारी क्लास में आना,,,
जो उसके पास बैठ जाऊँ
तो सर का मुझे वहाँ से हटाना,,,
फिर भी जैसे ही मौका मिले
उसके आस पास मंडराना,,,
बड़ा अच्छा लगता था,,,

मन ही मन
उससे ढेरों बातें बनाना,,,
जो वो सामने हो
तो एकदम चुप हो जाना,,,
उसे देख कर
मन ही मन मुस्कुराना,,,
बड़ा अच्छा लगता था,,,

miss confusion

miss confusion

सुबह सुबह उसे देखने के लिए
रोजाना prayer करवाना,,,
Prayer कराने के बहाने
चारों तरफ नज़रें दौड़ाना,,,
जो वो ना दिखे तो
मायूस हो जाना,,,
बड़ा अच्छा लगता था,,,

वो दिन भी क्या दिन थे
जब canteen में जाकर
घटों बातें करते थे,,,
टीचर का कोई खौफ नहीं था
पर तेरी नाराजगी से डरते थे,,,

पर ज़माने के आगे
हर शख्श मजबूर है,,,
मिलकर बिछड़ना
तो ज़माने का दस्तूर है,,,
पर तेरे साथ बिताया हर लम्हा सच्चा लगता था,,,
तुझसे दिनभर गुफ़्तगू करना
बड़ा अच्छा लगता था,,,
तुझसे दिनभर गुफ़्तगू करना
बड़ा अच्छा लगता था,,,!!!

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Abhilash kumar

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