Poetry

Ek Ladki Thi Pagli Si

एक लड़की थी पगली सी | Ek Ladki Thi Pagli Si poetry
Written by Abhilash kumar

एक लड़की थी पगली सी

~~~~~~~~दिल में हार्ट अटैक ~~~~~~~

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक  सा कर जाती थी…

अपने हर काम को वो
बड़े शिददत से निभाती थी…
दूसरों की ख़ुशी के लिए
अपना हर दर्द भूल जाती थी…

पागल थी वो थोड़ी सी
फिर भी दिल को भाती थी…
कभी कभी तो दिल में
हार्ट अटैक सा कर जाती थी…

Fashion queen नहीं थी वो
फिर भी कभी कभी लाली लिपस्टिक लगाती थी…
यूँ तो simple थी बिलकुल
पर कभी कभी इतराती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी…

मासूम सा था चेहरा उसका
पर लड़कों जैसी बातें बनाती थी…
उसकी यही छोटी छोटी हरकतें
सीधे दिल में उतर जाती थीं…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी…

भूल गया तेरी हर बात को

खुद कोई गलती करने से बचती थी
दूसरों को भी गलती से बचाती थी…
किसी और की गलती पर भी
खुद ही नीर बहाती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती है…

यूँ तो हँसमुख थी वो
पर कभी कभी गुस्सा भी हो जाती थी…
वो पल भी बड़ा प्यारा था
जब वो बेवजह चिल्लाती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी…

जल्द ही फिर शांत होकर
दोबारा से खिलखिलाती थी…
खुद भले ही नासमझ थी थोड़ी
पर फिर भी सबको समझाती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी…

कोई भी जो दुःखी हो
तो वो खुद को भूल जाती थी…
उसके चेहरे पर हँसी लाने की
हर कोशिश अपनाती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी….

उसकी इस ज़िन्दादिली को सजदा करता था मैं
क्योंकि ऐसी कोई दोस्त
बड़ी मुश्किल से मिल पाती थी…
कितनी भी परेशान क्यूँ ना हो खुद
फिर भी हर वक़्त मुस्कुराती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी…

एक लड़की थी
पगलो सी
दिल में हार्ट अटैक सा कर जाती थी….

एक लड़की थी पगली सी | Ek Ladki Thi Pagli Si poetry

एक लड़की थी पगली सी | Ek Ladki Thi Pagli Si poetry

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Abhilash kumar

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