Poetry

Dil v/s Dimaag

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एक रोज़ दिल और दिमाग में बहस हो गई की कौन बड़ा है

दिमाग ने कहा दिल (Dil)से-
मेरे बिना तू कुछ नहीं,,
दिल बोला-
वो इंसान ही क्या
जिसके पास दिल नहीं,,,

दिमाग ने कहा-
मैं सही गलत का भेद बताता हूँ,,
दिल बोला-
उसमें कोई गलती ही नहीं
जिसे मैं चाहता हूँ,,,

दिमाग ने कहा-
तू पागल है कुछ भी नहीं जानता,,
दिल बोला-
पागल तो हूँ
तभी तो उसके सिवा किसी और को नहीं मानता,,,

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दिमाग ने कहा-
मत पड़ प्यार के चक्कर में
ये तुझे बहुत तड़पाएगा,,
दिल बोला-
तड़पना भी जरुरी है
शायद उसका महबूब उसके लिए आएगा,,,

दिमाग ने कहा-
प्यार जैसी कोई चीज़ नहीं ज़माने में,,
दिल बोला-
एक बार आकर तो देख दिल के तहखाने में,,,

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दिमाग ने कहा-
तुझे समझाना व्यर्थ है,,
दिल बोला-
तू करके देख प्यार
इसी में तो ज़िन्दगी का अर्थ है,,,

फिर दिल ने कहा-
एक सवाल पूछता हूँ
सोच समझकर जवाब देना,,
भले ही तू उस शख्श का नाम नहीं लेना,,

पर जो वो तुझे ना मिले
तो क्या तू जी पायेगा,,
कहीं उसकी चाह में
फ़ना तो नहीं हो जायेगा,,,

तब दिल ने मुस्कुरा कर जवाब दिया-
सोचा तो था की उसकी चाह में
खुद को फ़ना कर दूँ
पर मैं उसकी चाहत के साथ जीना चाहता हूँ,,
इश्क़ में जान देना सब कुछ नहीं होता,,
इश्क़ के दर्द को भी मैं पीना चाहता हूँ,,,

दिल की बात सुनकर
दिमाग ने कहा-
तू जीता मैं हारा,,
तब दिल हँसते हुए बोला-
जीतता तो तू है
मुझे तो हारने में मज़ा आता है,,
दिल तो आखिर दिल है
जिसे चाहता है
बस उसी को चाहता है,,

चलते चलते
दिल और दिमाग दोनों हँसने लगे,,
अब मैं सुनूं तो किसकी सुनूँ,,
आखिर दोनों में ही कुछ कमी है,,
दिल के पास दिमाग नहीं,,
और दिमाग के पास दिल नहीं है,,,
दिल के पास दिमाग नहीं,,
और दिमाग के पास दिल नहीं है,,,!!!

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