Poetry

ज़िन्दगी का भरोसा

ज़िन्दगी का भरोसा |Jindagi ka bharosa
Written by Abhilash kumar

~~~ज़िन्दगी का भरोसा (Jindagi ka bharosa)~~~

ना कल था
ना आज है,,,

सूरज कुछ मद्धम सा है
या तो भोर है
या साँझ है,,,

जिंदगी के दिए में तेल
कुछ कम सा है,,,
हँसती हुई निगाहों के पीछे
एक चेहरा नम सा है,,,

ख़ामोशी की धुन्ध में कुछ अल्फ़ाज़
दबे दबे से हैं,,,
कुछ चेहरों के रंग साफ़ हैं
और कुछ छुपे छुपे से हैं,,,

धकधक की आवाज आती है
थोड़ी सीने से,,,
कहते हैं दर्द मिट जाता है
थोड़ी सी पीने से,,,

दर्द से दोस्ती

ज़िन्दगी एक पल की है
कब ये मौत के आगोश में सो जाये
कौन जाने,,,

घर से निकले दो पल के लिए
वापस लौटें ना लौटें
कौन जाने,,,

ज़िन्दगी का भरोसा
ना कल था
ना आज है,,,

सूरज कुछ मद्धम सा है
या तो भोर है
या साँझ है,,,

सूरज कुछ मद्धम सा है
या तो भोर है
या साँझ है,,,!!!

तुझे गलत कहने को जी चाहता है
ज़िन्दगी का भरोसा |Jindagi ka bharosa

ज़िन्दगी का भरोसा |Jindagi ka bharosa

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Abhilash kumar

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