Poetry

ज़िंदा हूँ मैं अभी, मरने के लिए

ज़िंदा हूँ मैं अभी, मरने के लिए
Written by Abhilash kumar

ज़िंदा हूँ मैं अभी, मरने के लिए!!!
शुक्र है ज़िंदा हूँ मैं अभी
एक हसीन मौत मरने के लिए,,,
लोग तो मरता छोड़ जाते हैं
घुट घुट के जीने के लिए,,,

ख्वाइशें अब कम ही करता हूँ
जो की थीं,
वो सभी दफ़्न हो गईं,,,
उम्मीदें भी नहीं हैं अब किसी से
जिनसे थीं,
वो शख्शियत ही रुक्सत हो गईं,,,

अब ज़िन्दगी जीने में
कुछ मज़ा सा आने लगा है,,,
तन्हाई का मानो
एक सुरूर सा छाने लगा है,,,

ज़िन्दगी का ये घड़ा है
अब बस यादों से भरने के लिए,,,
शुक्र है ज़िंदा हूँ मैं अभी
एक हसीन मौत मरने के लिए,,,

किसी रोज़ जी करता था
खुले आकाश में उड़ने का,,,
और परिंदों के साथ
एक छोटी सी उड़ान भरने का,,,

पर जिन पंखों से उड़ान भरनी थी
उन पंखों को ही मरोड़ दिया,,,
ज़िन्दगी ने हमारा रुख
तन्हाई की और मोड़ दिया,,,

अब नहीं चाहिए हमें कोई
इस तन्हाई से लड़ने के लिए,,,
शुक्र है ज़िंदा हूँ मैं अभी
एक हसीन मौत मरने के लिए,,,

ज़िन्दगी के खेल में
कठपुतली सा नाच रहा हूँ,,,
जहाँ ज़िन्दगी भगाती है
बस भाग रहा हूँ,,,

अनाड़ी हैं सब
इस ज़िन्दगी के खेल में
इसमें भला किसका महकमा है,,,
वही उस्ताद है इस खेल में
जिस पर ज़िन्दगी मेहरबाँ है,,,

अब तो जी तड़पता है बस
मौत को आग़ोश में भरने के लिए,,,
शुक्र है ज़िंदा हूँ मैं अभी
एक हसीन मौत मरने के लिए,,,
शुक्र है ज़िंदा हूँ मैं अभी
एक हसीन मौत मरने के लिए,,,!!!
ज़िंदा हूँ मैं अभी, मरने के लिए……..
ज़िंदा हूँ मैं अभी, मरने के लिए
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Abhilash kumar

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