Poetry

बेरोज़गारी का आलम

बेरोज़गारी का आलम
Written by Abhilash kumar

बेरोज़गारी का आलम तो देखिये जनाब,,,
एक रोज़ न्यूज़ में पढ़ा
अब तो चोर भी पकड़े जाते हैं
तो High Educated,,,

अब तो लगता है
अब तक हमने किया ही क्या,,,
आधी उम्र गुजर गई
कागज़ के चन्द टुकड़े जुटाने में,,,
और सरकारें लगी हुई हैं
हमें मूर्ख बनाने में,,,

पहले बोला डिग्री लाओ… जी ले आये,,
फिर बोला test निकालो… वो भी निकाल दिया,,,
अब कहते हैं इंतज़ार कीजिये,,
अच्छे दिन आएंगे,,,
अजी कब आएंगे…
जब हम में से आधे अल्लाह को प्यारे हो जायेंगे,,,???

ये सब करने में हम
रात रात भर जागे जैसे उल्लू,,,
फिर भी हमें क्या मिला
बाबाजी का ठुल्लू,,,

अब तो जी करता है
इन सब कागज के टुकड़ों को
एक ठेले पर सजाते हैं,,,
और गली गली जाकर फेरी लगाते हैं,,,

बेरोज़गारी का आलम

सरकार तो अंधी गूंगी बहरी है
उसे भला क्या जगाएँ,,,
क्या पता कुछ मेरे जैसे
पागल लोग ही जग जाएँ,,,

इतने पर भी सरकार हँसती है
और कहती है
जाग कर भी तुम हमारा क्या उखाड़ लोगे,,,
नौकरी तो आखिर
हमसे ही आकर लोगे,,,

जब नौकरी की बात आएगी
तो सब पीछे हट जाओगे,,,
हमें देने के लिए तुम
रिश्वत कहाँ से लाओगे,,,

ये सब देखकर लगता है
सरकार चाहें कोई भी हो,,
बस सूरत बदल जाती है
सीरत नहीं बदलतीं,,,
पत्थर पिघला करते हैं
चट्टानें नहीं पिघलतीं,,,
हम ही लोग पागल हैं

जो सरकार पर भरोसा करते हैं,,,
अजी इंसान बदला करते हैं,,,
लाशें नहीं बदलतीं,,,
इंसान बदला करते हैं
लाशें नहीं बदलतीं,,,
लाशें नहीं बदलतीं,,,!!!
by:- Sachin

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Abhilash kumar

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